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Breaking News !! विज्ञान की दुनिया की सबसे बड़ी क्षति, नहीं रहे स्टीफन हॉकिंग-

Lalit kumar Soni

Breaking News | महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का निधन हो गया है। वो 76 साल के थे। हॉकिंग मोटर न्यूरॉन नामक लाइलाज बीमारी से पीड़ित थे। जिसकी वजह से उनके शरीर के कई हिस्सों पर लकवा मार गया था। इसके बावजूद उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में नई खोज जारी रखी। ब्लैक होल और बिग बैंग थ्योरी को समझने में उन्होंने अहम योगदान दिया है। अमेरिका का सबसे उच्च नागरिक सम्मान भी उन्हें दिया गया है। स्टीफन हॉकिंग नियमित रूप से पढ़ाने के लिए यूनिवर्सिटी जाते हैं। उन्होंने ‘अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम’ किताब भी लिखी है। 21 साल की उम्र में हुई थी बीमारी हॉकिंग का जन्म ब्रिटेन में आठ जनवरी 1942 को हुआ। 21 साल की उम्र में उन्हें लाइलाज बीमारी हो गई। वे कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में सैद्धांतिक ब्रह्मांड विज्ञान के निदेशक थे।

हॉकिंग की गिनती आइंस्टीन के बाद सबसे बड़े भौतिकशास्त्री के तौर पर होती है। कंप्यूटर और विभिन्न गैजेट्स के जरिए वे अपने विचार व्यक्त करते थे। ब्लैक होल और बिग बैंग थ्योरी को समझने में उन्होंने अहम योगदान दिया है। ब्लैक होल और बिग बैंग थ्योरी को समझाने में दिया था अहम योगदान वैज्ञानिक स्टीफ़न हॉकिंग ब्लैक होल और बिग बैंग थ्योरी को समझाने में अहम योगदान दिया था। अमेरिका का सबसे उच्च नागरिक सम्मान भी उन्हें दिया गया है।

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बीमारी के बाद भी स्टीफन पढ़ाने के लिए रोज यूनिवर्सिटी जाते थे। उन्होंने ‘अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम’ किताब भी लिखी। मरने के अधिकार का सपोर्ट किया था   स्टीफन हॉकिंग ने 2013 में मरने के अधिकार जैसे विवादास्पद मुद्दे पर खुलकर राय व्यक्त किया था। उन्होंने कहा था, “मुझे लगता है लाइलाज बीमारी से पीड़ित व्यक्ति जिसे बहुत ज्यादा दर्द है, उसे अपने जीवन को खत्म करने का अधिकार होना चाहिए। उसकी मदद करने वाले व्यक्ति को किसी भी तरह की मुकदमेबाजी से मुक्त होना चाहिए।” अकेलापन होता था महसूस एक इंटरव्यू में हॉकिंग ने बताया था कि लोग उनसे बात करने या जवाब देने से डरते हैं। इस कारण वे कई बार अकेलापन महसूस करते हैं। शारीरिक रूप से अक्षम नहीं होने पर वे तैराकी करना पसंद करते।

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