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महिलाओं के विषय में आचार्य चाणक्य के ये 5 विवादित विचार जरूर पढ़ लें, वार्ना बाद में पछताना पड़ेगा..

Lalit kumar Soni

Chanakya Niti | चंद्रगुप्त मौर्य को चक्रवर्ती सम्राट बनाने वाले आचार्य चाणक्य देखने में तो बहुत कुरूप थे लेकिन उनकी नीतियों ने भारत के इतिहास को बदलकर रख दिया। और विश्व में उनकी बुद्धिमत्ता का वर्चस्व आज भी कायम है। अर्थशास्त्र और राजनीति के महान ज्ञाता रहे आचार्य चाणक्य के सिद्धांतों को आधुनिक युग में भी स्वीकार किया गया है। लेकिन चाणक्य ने महिलाओं के विषय में बहुत कुछ ऐसा कहा है जो भले ही उस समय स्वीकार कर लिया गया हो, लेकिन आज के दौर में उनके बयान बहुत हद तक विवादित हैं।

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तो चलिए जानते हैं कि चाणक्य के उन कथनों के बारे में जिसकी वजह से वे आज भी विवादों में घिरे हैं।

अविश्वसनीय हैं महिलाएं-

romantic couple
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आचार्य चाणक्य का कहना था कि एक व्यक्ति को कभी नदी, शाही परिवार, सींग वाले जानवर, हथियारों से लैस आदमी और महिलाओं पर भूलकर भी भरोसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये सब किसी भी वक्त धोखा दे सकते हैं।

धोखा देना-

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जीवन में कुछ सीखना हो तो उसके लिए भी आचार्य चाणक्य ने कई रास्ते बताए हैं। चाणक्य के मतानुसार संवाद, वाद विवाद की कला ब्राह्मण से, झूठ बोलना जुआ खेलने वालों से और धोखा देना औरतों से सीखना चाहिए।

घातक हैं महिलाएं-

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आचार्य चाणक्य का कहना था कि शाही परिवार, नासमझ इंसान, सांप, आग और महिला इन चारों से हमेशा बचकर रहना चाहिए, ये किसी भी वक़्त घातक साबित हो सकते हैं।

अस्थिर मनोस्थिति-

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औरतों के विषय में चाणक्य का कहना था कि वह कभी स्थिर रह ही नहीं सकतीं, उनका मन बहुत ही जल्दी बदलता है यही एक बड़ा कारण है कि उन पर विश्वास नहीं किया जा सकता।

झूठ बोलने की आदत-

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शायद ही दुनिया में कोई इंसान हो जिसने कभी झूठ ना बोला हो, सभी झूठ बोलते हैं। लेकिन चाणक्य के अनुसार झूठ बोलने का जिम्मा केवल महिलाओं के ही पास है। उनसे ज्यादा झूठ कोई पुरूष कभी नहीं बोल सकता। वे झूठ बोलने की कला में बेहद निपुण हैं।

महिलाओं का व्यक्तित्व-

why women live longer than men
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चाणक्य के अनुसार बेवकूफी करना, छल-कपट का सहारा लेना, झूठ बोलना, चालाक होना, क्रूर रहना आदि कुछ महिलाओं के व्यक्तित्व के प्राकृतिक दोष हैं। ये सभी दोष उनमें जन्मजात होते हैं।

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अब चाणक्य के इन कथनों में कितनी सच्चाई है इसका कोई पैमाना नहीं, वैसे भी चाणक्य के कथनों से जुड़े दस्तावेज बहुत ही पुराने हैं समय-समय पर उनके साथ छेड़छाड़ भी होती रही है। तो ये भी हो सकता है कि उपरोक्त कथन प्रक्षिप्तांश के तौर पर पढ़े जाते हैं अथवा उनकी व्याख्या ही कुछ गलत की गई हो।

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