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Coins ? नदी में सिक्के क्यों फेंके जाते हैं ? ये है वजह-

Sandy

भारत में ऐसी कई चीज़ें होती हैं, जिनके पीछे की वजह के बारे में हम नहीं जानते. कुछ चीज़ें हम दूसरों की देखा-देखी करने लगते हैं. आज ऐंसी ही एक प्रथा की बात करेंगे, जिसका कारण शायद आपको भी नहीं पता होगा.

अब तांबे के सिक्के नहीं चलते, लेकिन तब से चली आ रही इस प्रथा को लोग आज भी मान रहे हैं. हालांकि, इसके अलावा ज्योतिष में भी कहा गया है कि अगर किसी तरह का ग्रह दोष दूर करना हो, तो उसके लिए जल में सिक्के और कुछ पूजा सामग्री को प्रवाहित करने चाहिए. कुछ लोग ये भी मानते हैं कि अपनी कमाई का कुछ अंश सिक्के के रूप में नदी में फेंकने से तरक्की होती है आप अपने घर के किसी बुज़ुर्ग व्यक्ति से पूछ कर देख लो. वे जो भी बताएंगे, उसे कमेंट बॉक्स में हमें भी बताएं.




बस या ट्रेन से सफर करते समय जब आप नदियों के ऊपर पुल से गुजरते हैं, तो लोगों को नदियों में सिक्का डालते हुए ज़रूर देखा होगा. मुझे याद है जब भी मैं अपने मम्मी पापा के साथ कहीं जाता था, और अगर बस या ट्रेन किसी नदी के पुल से गुजर रही होती तो पापा जेब से एक रुपय का सिक्का मेरे हाथ में देकर उसको नदी में डालने का बोलते थे और मुझे भी ऐंसा करने में बहुत मजा आता था, आज उन्हीं को देखकर मैं जब भी नदियों को पार करता हूं, तो सिक्के नदी में डाल दिया करता हूं. पर इसके पीछे की वजह से आज तक अनजान रहा.
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लेकिन आज जब जानकारी मिली, तो मैं चाहता हूं कि इस जानकारी को अपने तक ही सीमित ना रखते हुए आप सबके साथ साझा करूँ। असल में यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है, हमारे माता-पिता, दादा-दादी सभी कहते भी हैं, कि जब भी नदी के ऊपर किसी पुल से गुजरो, सिक्का नदी में फेंक देना. लेकिन हमने भी उनसे कभी नहीं पूछा कि हम ऐंसा करता क्यों हैं।

coins in river by fenkmat
मुझे पता है कि आपको लग रहा होगा कि यह किसी तरह का अंधविश्वास होगा, जिस कारण लोग नदी में सिक्का फेंकते हैं. लेकिन दोस्तों, अगर आप सच में ऐसा ही सोच रहे हैं, तो आपका सोचना गलत है. इस प्रथा के पीछे एक बड़ा कारण है. असल में, जिस समय यह रिवाज शुरू हुआ उस समय में आज के स्टील के सिक्के की तरह नहीं बल्कि तांबे के सिक्के चला करते थे, और तांबा कितना फायदेमंद होता है, ये शायद आप बेहतर जानते होंगे.
अगर आप इतिहास में झांक कर देखें तो पता चलेगा कि पहले के ज़माने में पानी का मुख्य स्रोत नदियां ही हुआ करती थी. लोग हर काम में नदियों के पानी का ही इस्तेमाल किया करते थे. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो तांबा पानी का शुद्दीकरण करने में काम आता है और ये नदियों के प्रदूषित पानी को शुद्ध करने का एक बेहतर तरीका रहा था, इसलिए लोग जब भी नदी या किसी तालाब के पास से गुजरते थे, तो उसमें तांबे का सिक्का डाल दिया करते थे.

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अब तांबे के सिक्के नहीं चलते, लेकिन तब से चली आ रही इस प्रथा को लोग आज भी मान रहे हैं. हालांकि, इसके अलावा ज्योतिष में भी कहा गया है कि अगर किसी तरह का ग्रह दोष दूर करना हो, तो उसके लिए जल में सिक्के और कुछ पूजा सामग्री को प्रवाहित करने चाहिए. कुछ लोग ये भी मानते हैं कि अपनी कमाई का कुछ अंश सिक्के के रूप में नदी में फेंकने से तरक्की होती है आप अपने घर के किसी बुज़ुर्ग व्यक्ति से पूछ कर देख लो. वे जो भी बताएंगे, उसे कमेंट बॉक्स में हमें भी बताएं.

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