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हर साल दीपावली पर 100 करोड़ के नोटों और जेवरों से सजया जाता है, यह मंदिर

Sandy

dipawali रतलाम का माणकचौक स्थित प्राचीन महालक्ष्मी मंदिर 100 करोड़ के नोटों और जेवरों से सज गया है। भक्तों ने यहां बड़ी संख्या में नोट और जेवर रखे। मंगलवार को (धनतेरस) से गुरुवार को (दीपावली) तक यह मंदिर करोड़ों रुपए के नोटों से सजा रहेगा। इस दौरान हजारों भक्त मंदिर के अद्भुत सौंदर्य को देखने पहुंचेंगे। पिछले साल भी 100 करोड़ रुपए मूल्य के नोटों और गहनों से सजाया यह मंदिर सजा था।

नोटों की गड्डियों को थाली में सजाकर मंदिर पहुंचे लोग पुजारी की तरफ अपनी रकम बढाते हैं। पुजारी थाली लेकर गड्डियों को बाकी बंडलों के साथ रख देता है, नोटों की कोई गिनती नहीं होती है। रजिस्टर में नाम, पता नोट कर एक टोकन आगे बढ़ा दिया जाता है, भक्त टोकन लेकर हाथ जोड़ते हैं और चले जाते हैं। इसके बाद एक-एक कर इसी तरह नोटों की गड्डियां लेकर खड़े भक्त आगे बढ़ते हैं और अपने रुपए पुजारी को दे देते हैं।

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आस्था और विश्वास सिर्फ एक टोकन के भरोसे ये लोग भाईदूज के दिन आएंगे और टोकन देकर अपना धन ले जाएंगे। लक्ष्मीजी के चरणों में रखने के लिए लोग नोट, सोने-चांदी के आभूषण और हीरे-जवाहरात यहां बड़ी मात्रस में पहुंचते हैं। खास बात यह कि देते और लेते वक्त कोई हिसाब-किताब नहीं होता। लोगों की आस्था और विश्वास सिर्फ एक टोकन के भरोसे है, जो पुजारी की तरफ से नाेट रखने के बाद दिया जाता है।

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नोटों की गड्डियों, हीरे-जवाहरात से सजाया जाता है

लोगों की आस्था है कि यहां नोट-आभूषण रखने से सालभर बरकत रहती है।

गर्भगृह से लेकर सभागार तक नोटों की इन्हीं गड्डियों, हीरे-जवाहरात से सजाया जाता है। यह सिलसिला वर्षों से चल रहा है।

कारोबारी शैलेंद्र मांडोत कहते हैं टोकन तो इस बार से मिलने लगा है। इतने सालों में कभी कोई चीज इधर-उधर नहीं हुई।

उज्जैन के फ्रीगंज में रहने वाले कपिल शर्मा ने बताया 10 वर्षों से इस समय घर में जितनी भी नकदी रहती है, मंदिर में रख देते हैं। अब आभूषण भी रखने लगा हूं।

मान्यता के बारे में 62 साल के स्वर्ण व्यवसायी रामेश्वर सोनी बताते हैं कि ऐसा करने से घर, दुकान, व्यापार में बढ़ोतरी होकर समृद्धि बनी रहती है।

नोटों की गड्डियों की फिर भी गिनती हो सकती है, आभूषण व अन्य हीरे-जवाहरात की कीमत का अंदाजा लगाना मुश्किल है।

पुजारी पं. संजय कहते हैं हर साल मंदिर में पहुंचने वाली धन-संपदा में वृद्धि होती जा रही है।

 

100 करोड़ के नोटों से मंदिर सजा था

यहां नोटों, गड्डियों और आभूषणों से ही शृंगार किया जाता है। पिछले साल करीब 100 करोड़ के नोटों से मंदिर सजा था। भाईदूज से सामग्री लौटाने की शुरुआत हो जाएगी।

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