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इस गांव में चलते चलते सो जाते हैं लोग,और हफ़्तों तक सोते रहते हैं, आखिर क्या है वजह

Sandy 0

Mystery of Kazakhstan sleeping sickness | धरती पर शायद ही कोई होगा जो आपसे कहेगा कि उसे सोना पसंद नहीं है। दुनिया में सोने वालों की अलग-अलग कैटेगरी है, कोई सोने से पहले तमाम नुस्खे अपनाता है, नहा-धोकर, क्रीम पाउडर लगाकर बिस्तर पर पहुंचते हैं। कई लोग बिस्तर पर घंटों सांप की तरह लोटते हैं तब जाकर उनको नींद आती है। तो कुछ लोग बिस्तर पर आने से पहले ही नींद का मूड बना लेते हैं, तकिया पर सिर रखते ही नींद के आगोश में आ जाते हैं। लेकिन इसी पृथ्वी लोक पर कुछ लोग ऐसे हैं जो चलते-चलते सो जाते हैं। मतलब उन्हें कभी भी और कहीं भी नींद आ जाती है। सड़क पर, दफ्तर में, मैदान में, ऐसी कौन सी जगह है और ये लोग कौन हैं, आइए बताते हैं।

ये है जगह-

यह जगह है कजाकिस्तान, यहां एक छोटा सा गांव है कलाची। पिछले कुछ सालों से यहां के लोग एक अलग ही तरह की समस्या से पीड़ित हैं। यहां लोग कभी भी सो जाते हैं, सो जाने में समस्या नहीं है लेकिन परेशानी इस बात की है कि नींद कहीं भी और कभी भी आ जाती है। और एक बार सोए तो कब उठेंगे इसका ठिकाना नहीं है। कई बार तो लोग हफ्तों तक सोते ही रह जाते हैं। गांव के लोगों के साथ साथ वैज्ञानिक भी परेशान हैं कि आखिर यह बला क्या है।

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ये है कारण-

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Third party image

वक्त-बेवक्त नींद आने की परेशानी के पीछे वैज्ञानिकों ने लंबा चौड़ा शोध किया। 810 लोगों की आबादी वाले इस गांव में लगभग 200 लोग इस गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं। कुछ केस ऐसे भी हुए हैं, जहां लोग नींद में ही परलोक सिधार गए हैं। कई परीक्षणों के बाद सामने आया कि इलाके में कार्बन मोनो ऑक्साइड और हाइड्रो कार्बन का स्तर ज्यादा है। जिस वजह से लोगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है, इसी कारण लोग रहस्यमयी नींद के शिकार हो रहे हैं। लेकिन ऐसे में सवाल आया कि अगर यह कारण है तो इसका असर गांव के सभी लोगों पर क्यों नहीं है, सिर्फ कुछ ही लोग इससे ग्रसित क्यों ?

एक और कारण-

पहला कारण पूरी तरह से मान्य नहीं होने के बाद वैज्ञानिकों को फिर से सिर खपाना पड़ा। शोधकर्ताओं का तर्क है कि यहां बंद पड़े यूरेनियम की खादानों से अत्यधिक मात्रा में कार्बन मोनो ऑक्साइड निकल रही है। लेकिन सवाल वही कि अन्य लोगों और जानवरों पर इसका असर क्यों नहीं।

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ये निकाला गया हल-

8 सालों से यह परेशानी गांव वालों के साथ साथ कजाकिस्तान के वैज्ञानिकों को भी परेशान कर रही है। फिलहाल, गांव के लोगों को वहां से निकाल लिया गया है और दूसरी जगह रहने का प्रबंध कर दिया गया है।

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