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तेजी से फ़ैल रहा खतरनाक वायरस “निपाह” केरला में 10 की मौत, फलों से भी हो सकते हैं संक्रमण के शिकार

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केरल के कोझिकोड जिले में रहस्यमय और बेहद घातक ‘निपाह’ वायरस की चपेट में आकर अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है और 2 लोगों की हालत नाजुक बनी हुई है। इस खतरनाक वायरस से पीड़ित 25 मरीजों को निगरानी में रखा गया है। Nipah virus वायरस से जुड़ी और जानकारियां हासिल करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग ने भी प्रभावित जिले में एक टीम भेज दी है। हम आपको बता रहे हैं इस खतरनाक वायरस निपाह से जुड़ी अहम बातें.

Nipah virus का पहला मामला सबसे पहले सिंगापुर-मलेशिया में 1998 और 1999 में सामने आया था। ये सबसे पहले सुअर, चमगादड़ या अन्य जीवों को प्रभावित करता है और इसके संपर्क में आने से मनुष्यों को भी चपेट में ले लेता है।
मलेशिया में सबसे पहले इसके लक्षण दिखाई दिए थे जब एक व्यक्ति को इस वायरस ने चपेट में लिया और उसकी मौत हो गई थी, उसी गांव के नाम पर इसको निपाह नाम दिया गया। इस वायरस को विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्थलीय पशु स्वास्थ्य संहिता में लिस्टेड किया गया है।

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nipah virus
Image credit DB

कैसे फैलता है निपाह वायरस: Nipah virus मनुष्यों के संक्रमित सुअर, चमगादड़ या अन्य संक्रमित जीवों से संपर्क में आने से फैलता है। यह वायरस एन्सेफलाइटिस का कारण बनता है। यह इंफेक्‍शन फ्रूट बैट्स के जरिए लोगों में फैलता है। खजूर की खेती करने वाले लोग इस इंफेक्‍शन की चपेट में जल्‍दी आते हैं। 2004 में इस वायरस की वजह से बांग्लादेश में काफी लोग प्रभावित हुए थे।

निपाह वायरस के लक्षण
निपाह वायरस (Nipah Virus) के इलाज का एकमात्र तरीका कुछ सहायक दवाइयां और पैलिएटिव केयर है. वायरस की इनक्यूबेशन अवधि 5 से 14 दिनों तक होती है, जिसके बाद इसके लक्षण दिखाई देने लगते हैं. सामान्य लक्षणों में बुखार, सिर दर्द, बेहोशी और मतली शामिल होती है. कुछ मामलों में, व्यक्ति को गले में कुछ फंसने का अनुभव, पेट दर्द, उल्टी, थकान और निगाह का धुंधलापन महसूस हो सकता है.”

“लक्षण शुरू होने के दो दिन बाद पीड़ित के कोमा में जाने की संभावना बढ़ जाती है. वहीं इंसेफेलाइटिस के संक्रमण की भी संभावना रहती है, जो मस्तिष्क को प्रभावित करता है.”

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इंसानी संपर्क से भी फैलता है 
यह दुर्लभ और खतरनाक वायरस संक्रमित सूअर, चमगादड़ से इंसानों में फैलता है। इसके अलावा NiV इंफेक्टेड व्यक्ति के संपर्क में आने से भी यह वायरस फैलता है।

कैसे करें बचाव ?
पेड़ से गिरे हुए फल न खाएं।
जानवरों के खाए जाने के निशान हों तो ऐसी सब्जियां न खरीदें।
जहां चमगादड़ अधिक रहते हों वहां खजूर खाने से परहेज करें।
संक्रमित रोगी, जानवरों के पास न जाएं।

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